उद्योग Udyog Kise Kahate Hain, अर्थ, प्रकार

आज के आर्टिकल में हम उद्योग के बारे में पूरी जानकारी देंगे, इनमे कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं शामिल किया गया है:

Highlights:

  1. उद्योग किसे कहते है Udyog Kise Kahate Hain
  2. उद्योग के प्रकार क्या है

उद्योग किसे कहते है (Udyog Kise Kahate Hain):

वे सभी क्रियाएँ जिनके जरिये कच्चे माल यानी कि रॉ मटेरियल (Raw Material) को तैयार माल (Finished Product) में परिवर्तित किया जाता है, उन्हें उद्योग में शामिल किया जाता है.

अन्य शब्दों में कहाँ जाये तो उद्योग का अर्थ ऐसे वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और प्रक्रिया से है और इन क्रियाओं जो इकाइयाँ ये सभी प्रक्रिया का क्रियान्वयन करती है उन्हें औद्योगिक इकाईयाँ कहते हैं।

उद्योग में मानव प्रकृति के द्वारा दिए गए पदार्थों का सृजन कर उन्हें उपभोग रूप में बनाने का प्रयास करती है, यदि इसका अच्छा उदहारण ले तो बैंकिंग, बीमा, परिवहन, आदि सेवाएँ प्रदान करना भी उद्योग का अंग है तथा इन्हें सेवा उद्योग कहते हैं।

आपको बता दे कि उद्योगों में तीन प्रकार के माल को तैयार किया जाता है:

  1. उत्पादक माल एवं पूँजीकृत माल
  2. उपभोक्ता माल
  3. मध्यवर्ती माल

उत्पादक माल एवं पूँजीकृत माल:

ऐसे वस्तुओं को दूसरे उद्योगों के जरिये उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है, उन्हें उत्पादक वस्तुएँ कहते हैं। उदाहरण के लिए मशीनरी, प्लांट, यन्त्र आदि ।

उपभोक्ता माल:

ऐसे वस्तुओं का प्रयोग सीधे उपभोग के रूप में लाया जाता है उन्हें उपभोक्ता माल के रूप में जाना जाता है उदारहरण के लिए, डबल रोटी, कपड़ा, दवाईयाँ आदि।

मध्यवर्ती माल:

कई सारी उद्योग में ऐसे वस्तुएं भी होती है जिनका किसी दूसरी उद्योग में प्रोसेस करके नई वस्तुएं बनाई जाती है, इन्हें ही मध्यवर्ती माल के रूप में जाना जाता है, जैसे कि प्लास्टिक , एल्युमीनियम आदि

उद्योगों के प्रकार (Types of Industries):

  1. प्राथमिक उद्योग (Primary Industry)
  2. गौण उद्योग (Secondary Industry)
  3. तृतीय श्रेणी के उद्योग अथवा सेवा उद्योग (Tertiary Industry or Service Industries)
types of industries in hindi

प्राथमिक उद्योग (Primary Industry):

इस प्रकार के उद्योग में ऐसे क्रियाओं को शामिल किया जाता है जिसमे प्राकृतिक संसाधनों यानी कि Natural Re- sources कि मदद से अन्य उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराया जाता है.

अन्य शब्दों में कहाँ जाये तो ऐसे उद्योगों से अभिप्राय है जिसमे प्राकृतिक संसाधनों जैसे कोयला, खनिज पदार्थ, तेल आदि के निष्कर्षण एवं जैविक पदार्थ जैसे- पौधे, पशु आदि के प्रजनन एवं विकास से जुड़ी क्रियाओं से हैं।

प्राथमिक उद्योग को दो प्रकार शामिल है:

  1. जननिक उद्योग (Genetic Industry)
  2. निष्कर्षण उद्योग (Extractive Industry)

इन्हें भी पढ़े: लघु उद्योग (Laghu Udyog) और कुटीर उद्योग (Kutir Udyog) पूरी जानकारी

जननिक उद्योग (Genetic Industry):

ऐसे उद्योगों से अभिप्राय है जिनके अंतर्गत पशुओं व वनस्पति की नस्लों को सुधार करके उन्हें अधिक उपयोगी बनाया जाता है। इन उद्योगो में शामिल है: मुर्गी पालन, मछली पालन, फूलों की खेती, पौधारोपण, पशु-पालन, आदि

निष्कर्षण उद्योग (Extractive Industry):

इन उद्योगों कि मदद से पृथ्वी, जल या वायु से कई ऐसे पदार्थ को निकाला जाता है जैसे- खानों व कुओं से कोयला, लोहा, गैस, तेल आदि निकालना, खुली खानों से पत्थर निकालना.

गौण उद्योग (Secondary Industry):

इस उद्योग के अंतर्गत ऐसे कई सारी उत्पादित कि हुयी वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है और नयी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है

जैसे- कपास का उत्पाद करना प्राथमिक उद्योग की क्रिया है, जबकि कपास से कपड़ा बनाना द्वितीयक उद्योग (Secondary Industry) में आते है गौण उद्योग दो प्रकार के होते हैं।

निर्माण उद्योग (Manufacturing Industry):

इस उद्योग में हम अक्सर कच्चे माल यानी कि Raw Material या Semi finished Material को मानव व मशीनों की मदद से तैयार माल (Finished Goods) में बदला जाता है

उदहारण: कपास से कपड़ा कच्चे लोहे से इस्पात, गन्ने से चीनी, बाँस से कागज व पत्थर से सीमेंट बनाना.

निर्माण उद्योग के 4 प्रकार है-

  1. विश्लेषणात्मक उद्योग
  2. प्राविधिक उद्योग
  3. सम्मिश्रण उद्योग
  4. संयोजक उद्योग

रचनात्मक उद्योग (Constructive Industry):

इन उद्योगों के जरिये हम दुसरे उद्योगों कि सहायता से और उत्पादित वस्तुओं a उपयोग करके रचात्मक कार्य करते है. उदाहरण: लोहा, ईंट, लकड़ी आदि का प्रयोग करके भवन, पुल, सड़क, बांध आदि का निर्माण करना

तृतीय श्रेणी के उद्योग अथवा सेवा उद्योग (Tertiary Industry or Service Industries):

इस श्रेणी के उद्योग को Service Industry या सेवा उद्योग भी कहते है, इस प्रकार के उद्योग में उन सभी सेवाओं को शामिल किया जाता है जो सभी व्यवसाय को स्वचलित रूप से चलाने में मदद करती है

उदाहरण: विज्ञापन, संग्रहण आदि की सेवाएँ आजकल इन सभी सेवाओं को उद्योगों की सेवाओं के नाम से जाना जाता है।

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