वैश्वीकरण (Vaishvikaran) क्या है, कारक, प्रभाव

इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि वैश्वीकरण (Vaishvikaran) क्या है, कारक, प्रभाव और अन्य तथ्यों के बारे में समझेंगे

विगत कुछ वर्षो से अधिकांश बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने उत्पादन के लिए सस्ते स्थानों की तलाश की है। जिसके वजह से इन देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश में वृद्धि हो रही है और विभिन्न देशों के बीच विदेशी व्यापार में भी वृद्धि हो रही है।

वैश्वीकरण (Vaishvikaran) क्या है:

हम सभी जानते है कि विदेशी व्यापार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के द्वारा बड़ा हिस्सा नियंत्रित होता है, जिसके कारण विभिन्न देशों के बाजार और उत्पादनों में एकत्रित होता है, इसे वैश्वीकरण भी कहा जाता है.

जो कि विभिन्न देशों के बीच परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकता की प्रक्रिया है। इससे वस्तुएँ, सेवाएँ, निवेश और प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान होती हैं।

1990-91 और 2014-15 के बीच विदेशी व्यापार कई गुना बढ़ गया है। भारत ने वर्ष 1990-91 में कुल 33,150 करोड रूपए की सामग्री का निर्यात किया। वर्ष 2014-15 में यह राशि बढ़कर 1935,000 करोड़ रूपए हो गई।

इन्हें भी पढ़े: मैक्रो इकोनॉमिक्स क्या है, इसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी

वैश्वीकरण के कारक (Vaishvikaran Ke Karak):

  1. प्रौद्योगिकी:

वैश्वीकरण की प्रक्रिया को तीव्र करने में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT, Information and communication technology) के विकास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आज के समय को कंप्यूटर युग कहाँ जाता है, इस समय कंप्यूटर नेटवर्क, मोबाइल, ईमेल, ईकामर्स, व्हाटसएप जैसे चीजों हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हो गए हैं इसके साथ ही संचार उपग्रहों ने इसे और आसान बना दिया है

अनेक कंपनियों ने इसी technology का लाभ उठा कर अपने बिजनेस को फैलाया है। उन्हें उत्पादन से संबंधित त्वरित जानकारी मिलती है जिसे विश्लेषण करके और उसके आधार पर निर्णय लिए जाते हैं।

भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव (Impact of Globalization in India in Hindi):

आपको बता दे कि वैश्वीकरण का प्रभाव भारतीय समाज के सभी वर्गों पर समान रूप से नही पड़ा है, उत्पादकों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से धनी वर्ग के शहरी क्षेत्र में विशेषकर उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है।

इन उपभोक्ताओं के पास अब पहले से ज्यादा विकल्प है, जिसके वजह से वे उत्पादों कि उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम कीमत से लाभान्वित हो रहे हैं, जिसके वजह से अब ये लोग अब पहले कि तुलना आज का समय कि उच्चतर जीवन स्तर का आनन्द ले रहे हैं।

.इसके साथ ही भारत की कई ऐसे टॉप शीर्ष कंपनियां भी इस बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा से लाभान्वित हुई ह, जिसके वजह से कई कंपनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी और उत्पादन प्रणाली में निवेश करके अपने उत्पादन मानकों ऊँचा उठाने में अहम भूमिका निभाई है

वैश्वीकरण ने सेवा प्रदाता कंपनियों विशेषकर सूचना और संचार प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए विशेष अवसर तो प्रदान किये है परन्तु इसके साथ ही वैश्वीकरण ने छोटे उत्पादकों और श्रमिकों के लिए चुनीतियों खड़ी की है।

बैटरी, प्लास्टिक, खिलौने टायरों, सेयरी उत्पादों एवं खाद्य तेल के उद्योग कुछ ऐसे उदाहरण है जहाँ प्रतिस्पर्धा के कारण छोटे विनिर्माताओं पर कड़ी मार पड़ी है।

कई इकाईयाँ बंद हो गई जिसके चलते अनेक श्रमिक बेरोजगार हो गए। भारत में लघु उद्योगों में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक (2 करोड़) नियोजित हैं।

प्रतिस्पर्धा और रोजगार की अनिश्चितता:

वैश्वीकरण और बढ़ते हुए प्रतिस्पर्धा के दबाव ने श्रमिकों के जीवन को प्रतिकूल प्रभावित किया है, बढ़े हुए प्रतिस्पर्धा ने यह साबित किया है कि इन दिनों श्रमिकों को रोजगार देने में लचीलापन पसंद करते हैं। इसका अर्थ है कि श्रमिकों का रोजगार अब सुनिश्चित नहीं है।

Leave a Comment

error: Content is protected !!