आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से Micro Economic in Hindi के बारे में सारी जानकारी देंगे जैसे:
- What is Micro Economic in Hindi
- Microeconomics Ki Definition in Hindi
- Characteristics of Micro Economics in Hindi
- Types of Micro Economics in Hindi
- Uses of Micro Economics in Hindi
What is Micro Economic in Hindi:
अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition): हिन्दी भाषा का शब्द ‘व्यष्टि अर्थशास्त्र’ अंग्रेजी भाषा के शब्द माइको (Micro), ग्रीक भाषा के शब्द ‘माइक्रोस’ (Micros) का हिन्दी रूपान्तरण है। व्यष्टि से अभिप्राय है- अत्यन्त छोटी इकाई, दस लाख भाग | अर्थात् व्यष्टि अर्थशास्त्र का संबंध अध्ययन की सबसे छोटी इकाई से है।
इस प्रकार, व्यष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत वैयक्तिक इकाइयों जैसे—व्यक्ति, परिवार, उत्पादक फर्मों, उद्योग आदि का अध्ययन किया जाता है। व्यष्टि अर्थशास्त्र की इस रीति का प्रयोग किसी विशिष्ट वस्तु की कीमत निर्धारण, व्यक्तिगत उपभोक्ताओं तथा उत्पादकों के व्यवहार एवं आर्थिक नियोजन, व्यक्तिगत फर्म तथा उद्योग के संगठन आदि तथ्यों के अध्ययन हेतु किया जाता है।
व्यष्टि अर्थशास्त्र की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं (Microeconomics Ki Definition in Hindi):
1. प्रो. बोल्डिंग के अनुसार, “व्यष्टि अर्थशास्त्र विशिष्ट फर्मों, विशिष्ट परिवारों, वैयक्तिक कीमतों मजदूरियों, आयों, विशिष्ट उद्योगों और विशिष्ट वस्तुओं का अध्ययन है।”
2. प्रो. हैण्डरसन और क्वाण्ट के शब्दों में, “व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तियों एवं उचित रूप से परिभाषित व्यक्ति समूहों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन होता है “
3. प्रो. लर्नर के अनुसार, “व्यष्टि अर्थशास्त्र में अवंशास्त्र को सूक्ष्म यंत्र से देखा जाता है, जिससे कि यह ज्ञात हो सके कि आर्थिक जीव के लाखों कोष्ठ व्यक्ति एवं परिवार, उपभोक्ताओं के रूप में और व्यक्ति व फर्मे उत्पादकों के रूप में समस्त आर्थिक जीवन के कार्य संचालन में किस प्रकार अपना योगदान दे रहे हैं।”
व्यष्टि अर्थशास्त्र की विशेषताएँ (Characteristics of Micro Economics in Hindi) व्यष्टि अर्थशास्त्र की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं-
1. वैयक्तिक इकाइयों का अध्ययन–व्यष्टि अर्थशास्त्र की पहली विशेषता यह है कि यह वैयक्तिक इकाइयों का अध्ययन करती है। व्यष्टि अर्थशास्त्र वैयक्तिक आय, वैयक्तिक उत्पादन एवं वैयक्तिक उपभोग आदि की व्याख्या करने में सहायता करता है। यह प्रणाली अपना संबंध समूहों से न रखकर इकाइयों से रखती है। इस प्रकार व्यष्टि अर्थशास्त्र वैयक्तिक समस्याओं का अध्ययन करते हुए समस्त अर्थव्यवस्था के विश्लेषण में सहायता प्रदान करता है
2. सूक्ष्म चरों का अध्ययन- सूक्ष्म अर्थशास्त्र की दूसरी विशेषता के रूप में यह छोटे-छोटे चरों का अध्ययन करती है। इन चरों का प्रभाव इतना कम होता है कि इनके परिवर्तनों का प्रभाव सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ता है, जैसे—एक उपभोक्ता अपने उपभोग और एक उत्पादक अपने उत्पादन से सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था की माँग एवं पूर्ति को प्रभावित नहीं कर सकता है।
3. व्यक्तिगत मूल्य का निर्धारण- व्यष्टि अर्थशास्त्र को कीमत सिद्धान्त अथवा मूल्य सिद्धान्त के नाम से भी जाना जाता है। इसके अंतर्गत वस्तु की माँग एवं पूर्ति की घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। इसके साथ-ही-साथ माँग एवं पूर्ति के द्वारा विभिन्न वस्तुओं के व्यक्तिगत मूल्य निर्धारण भी किये जाते हैं।
व्यष्टि अर्थशास्त्र के प्रकार (TYPES OF MICRO ECONOMICS IN HINDI):
व्यष्टि अर्थशास्त्र के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. व्यष्टि स्थैतिकी: व्यष्टि स्थैतिकी विश्लेषण में किसी दी हुई समयावधि में संतुलन की विभिन्न सूक्ष्म मात्राओं के पारस्परिक संबंधों की व्याख्या की जाती है। इस विश्लेषण मैं यह मान लिया जाता है कि संतुलन की स्थिति एक निश्चित समय बिन्दु से संबंधित होती है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता है।
2. तुलनात्मक सूक्ष्म स्थैतिकी – तुलनात्मक सूक्ष्म स्थैतिको विश्लेषण विभिन्न समय बिन्दुओं पर विभिन्न संतुलनों का तुलनात्मक अध्ययन करता है
3. सूक्ष्म प्रावैगिकी: सूक्ष्म प्रावैगिकी विश्लेषण के माध्यम से हम पुराने संतुलन से नये संतुलन की ओर अगसर होते हैं। यह विश्लेषण पुराने और नए संतुलन के संक्रमण काल को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, किसी वस्तु की कीमत माँग और पूर्ति के संतुलन का परिणाम होती है. अब मान लीजिए कि बाजार में उस का वस्तु की मांग घट जाती है। माँग के घट जाने से बाजार में माँग पूर्ति का संतुलन टूट जाएगा।
व्यष्टि अर्थशास्त्र की उपयोगिता (Uses of Micro Economics in Hindi):
1. सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक,
2. आर्थिक समस्याओं के निर्णय में सहायक,
3. आर्थिक नीति के निर्धारण में सहायक,
4. आर्थिक कल्याण की शर्तों का निरीक्षण,
5. व्यक्तिगत इकाइयों के आर्थिक निर्णय में सहायक,
6. व्यक्तिगत इकाइयों की समस्याओं के समाधान में उपयोगी ।
व्यष्टि अर्थशास्त्र की सीमाएँ
1. केवल व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन,
2. अवास्तविक मान्यताएँ,
3. व्यष्टि निष्कर्ष, समग्र अर्थव्यवस्था के लिए अनुपयुक्त,
4. संकुचित अध्ययन,
5. अव्यावहारिक

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